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ब्लॉग्स (63)
height="240px" width="188px" align="left"/>> GURUDHAM Please contact our Jodhpur Gurudham to place orders for Books, Sadhana Articles, Cassettes etc. by post. Orders may be placed by letter, fax, telephone or email. There are various Sadhana procedures ... आगे पढ़ें...

>एक बार एक ऋषि समुद्र के किनारे खड़े सूरज की भव्यता देख रहे थे। वे एक पेड़ के नीचे शांत वातावरण में खड़े थे। समुद्र की ओर से ठंडी, ताजगी भरी हवा चल रही थी और उसके साथ वृक्षों के उपरी भाग-हल्के झूम रहे थे, बहुत दूर नीले पर्वतों पर बादल छाये हुए थे।वहां उनके ... आगे पढ़ें...

>ॐ नमो गुरुभ्यो गुरुपादुकाभ्यो नमः परेभ्यः परपादुकाभ्यः ।आचार्य सिद्धेश्वर पादुकाभ्यो नमो नमः श्रीगुरुपादुकाभ्यः ॥१॥मैं पूज्य गुरुदेव को प्रणाम करता हूँ, मेरी उच्चतम भक्ति गुरु चरणों और उनकी पादुका के प्रति हैं, क्योंकि गंगा -यमुना आदि समस्त नदियाँ और ... आगे पढ़ें...

कुछ विशेष रोग निवारण मंत्रयों तो किसी भी समस्या के समाधान हेतु अनेको उपाय हैं। परन्तु मंत्रों के माध्यम से समस्या के निवारण के पीछे धारणा यह है कि मंत्र शक्ति एवं दैवी शक्ति के द्वारा साधक को वह बल प्राप्त होता है जिससे कि किसी भी समस्या का समाधान सहज हो ... आगे पढ़ें...

श्री नवग्रह शाबर मंत्र श्री नवग्रह शाबर मंत्र.................. आगे पढ़ें...

>अम्बाकी करो उपासना, वो मिटाएगी सारी वासनातुम द्रष्टि करो एकबार, वो करेगी द्रष्टि लगातार.एक कदम बढाओ आगे, वो दोडी आयेगी तत्कालचाहिए ना उसे कुछ ओर, वो चाहे भक्तो का प्यार.किया है भक्तोने अनुभव, वो भुली ना कभी एक पलहरे सब पीडा तत्काल, देती अभय वर हरदम.वो ... आगे पढ़ें...

प्रस्तुत वाङ़्मय एक प्रयास है, इस युग के व्यास परमपूज्य गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्य के जीवन-दर्शन को जन-जन तक पहुँचाने का। आज से 85 वर्ष पूर्व आगरा के आँवलखेड़ा ग्राम में जन्मा वेदमूर्ति तपोनिष्ठ की उपाधि प्राप्त भारतीय संस्कृति के उन्नयन को समर्पित ... आगे पढ़ें...

बीसवीं शताब्दी की शुरुआत भारी उथल-पुथल भरी हुई। जहाँ एक युगनायक स्वामी विवेकानन्द ने महाप्रयाण किया, वहाँ प्रथम विश्वयुद्ध के बादल भी मँडराने लगे, परंतु भारत की तत्कालीन विपन्न परिस्थितियों में स्वतंत्रता के लिए लड़ाई कर रहे योद्धाओं के बीच एक ऐसे महामानव ... आगे पढ़ें...

राष्ट की आजादी के बाद एक बहुत बड़ा वर्ग तो उसका आनन्द लेने में लग गया किन्तु एक महामानव ऐसा था जिसने भारत के सांस्कृतिक आध्यात्मिक उत्कर्ष हेतु अपना सब कुछ नियोजित कर देने का संकल्प लिया। यह महानायक थे श्रीराम शर्मा आचार्य। उनने धर्म को विज्ञान सम्मत ... आगे पढ़ें...

समर्पणजिनके चिन्तन से सांख्य (तत्त्वविचार) को समय के अनुरूप जीवन्त दिशा मिली, योग को जिन्होंने युगानुकूल जीवन विद्या के रूप में प्रतिष्ठित किया, अपनी सूक्ष्म-वेधक दृष्टि से जिन्होंने जीवन और जीवन सूत्रों का दर्शन किया और इस प्रत्यक्ष अनुभूति के आधार पर ... आगे पढ़ें...

जिन्होंने महर्षि गौतम और कणाद की तरह न्याय एवं वैशेषिक धाराओं का सम्यक् दर्शन किया, अपनी अनुपम मेधा से पदार्थ-विज्ञान को अध्यात्म-विज्ञान का पूरक बनाकर ‘वैशेषिक को युगानुकूल साक्ष्य देकर लौकिक जीवन में अभ्युदय का तथा विचार-विज्ञान को भाव-विज्ञान का सहयोगी ... आगे पढ़ें...

जिन्होंने महर्षि बादरायण की तरह वेदान्त-सूत्रों का साक्षात्कार किया, वेदमूर्ति कहलाए, वेदमन्त्रों की आदि स्रोत्र परब्रह्म और वेद जननी गायत्री में पुन: अभेद स्थापित कर उन तक पहुँचने के लिए साधकों को ब्रह्म-सूत्रों की युगानुरूप व्याख्या एवं विधा प्रदान की, ... आगे पढ़ें...

जिन्होंने महर्षि बादरायण की तरह वेदान्त-सूत्रों का साक्षात्कार किया, वेदमूर्ति कहलाए, वेदमन्त्रों की आदि स्रोत्र परब्रह्म और वेद जननी गायत्री में पुन: अभेद स्थापित कर उन तक पहुँचने के लिए साधकों को ब्रह्म-सूत्रों की युगानुरूप व्याख्या एवं विधा प्रदान की, ... आगे पढ़ें...

जिन्होंने महर्षि बादरायण की तरह वेदान्त-सूत्रों का साक्षात्कार किया, वेदमूर्ति कहलाए, वेदमन्त्रों की आदि स्रोत्र परब्रह्म और वेद जननी गायत्री में पुन: अभेद स्थापित कर उन तक पहुँचने के लिए साधकों को ब्रह्म-सूत्रों की युगानुरूप व्याख्या एवं विधा प्रदान की, ... आगे पढ़ें...

प्रस्तुत वाङ़्मय एक प्रयास है, इस युग के व्यास परमपूज्य गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्य के जीवन-दर्शन को जन-जन तक पहुँचाने का। आज से 85 वर्ष पूर्व आगरा के आँवलखेड़ा ग्राम में जन्मा वेदमूर्ति तपोनिष्ठ की उपाधि प्राप्त भारतीय संस्कृति के उन्नयन को समर्पित ... आगे पढ़ें...

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